बचपन से मैंने यह सोचा कि हमारा मस्तिष्क आखिरकार काम कैसे करता होगा? विद्यालय में पढ़ाए गए कंप्यूटर की चीप की तरह या फिर फिल्मों और कार्टून्स में दिखाएं कल्पनाओं की तरह, कुछ जवाब कक्षा दसवीं की विज्ञान की पुस्तक से मिले जिनमें सभी कार्यो के लिए अलग अलग चैंबर समझाएं गए। लेकिन अभी भी प्रश्न यह था कि कोई मनुष्य अपने विचारों, कार्य आदि को किस तरह से नियंत्रित कर सकता है। उन प्रश्नो का जवाब अब मुझे मिल गया है। और वो जवाब मुझे “मस्तिष्क और विचारों से जीवन की रचना कैसे कैरे” नामक किताब से मिली, जिसके लेखक श्री दिनेश नंदन सहाय जी हैं।

दिनेश नंदन सहाय का जन्म झांसी में हुआ था। उनकी शिक्षा डी. ए. वी. कालेज से संपन्न हुई थी। सेना में जाने की उनकी इच्छा बीमारी के कारण पूरी नहीं हो पाई लेकिन वे अपने लेखों से बहुत अच्छे काम कर रहें है। आपने ने एक प्रोग्राम enlighten the lamp of your fortune बनाया जिसमें व्यक्ति अपने लक्ष्य, सपने, समस्या और इच्छा कि पूर्ति के लिए कार्य कर सकता था। इस पहले आपने ऑनलाइन प्रारंभ किया और लोगो को इससे जोड़ने का प्रयास किया। आपने अंग्रेजी में एक किताब इसी प्रोग्राम के नाम से enlighten the lamp of your fortune (अपने भाग्य को उजागर करे) लिखी जिसमें आपके प्रोग्राम की पूरी विधि प्रस्तुत थी और इस किताब अर्थात “मस्तिष्क और विचारों से जीवन की रचना कैसे करें” में भी बतलाई है।

“मस्तिष्क और विचारों से जीवन की रचना कैसे करें” पुस्तक में मनुष्य कैसे अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर, अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, अपने मस्तिष्क को मजबूत बनाकर अपने कार्य को सिद्ध करने के लिए कार्य करता है, यह बातें विस्तारपूर्वक बताई गई है। पुस्तक की शुरूआत “प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य की यात्रा” नामक अध्याय से हुई है, जिसमें प्रकृति, ईश्वर एवं मनुष्य तीनों के मध्य पस्पर सम्बन्ध को बताया है। मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रकृति और ईश्वर पर निर्भरता को प्रेषित करता है। आत्मसम्मान, आत्मविश्लेषण, आत्मसंयम, अनुशासन आदि से सफलता प्राप्त कर ईश्वर तक पहुंचने का सुगम पथ प्रदर्शित किया गया है।  व्यक्ति अपने विचारों से अपने भाग्य का स्वयं निर्माता बन सकता है। प्रकृति का एक यथार्थ नियम “आप जैसा सोचेंगे आप वैसे बनेंगे” जैसे विचारों के माध्यम से ही दिनेश जी ने शब्दों कि महत्ता को समझाया है। दिनेश जी द्वारा लिखित एक पंक्ति इस भावार्थ को समझने में सहायक होगी जो है “मस्तिष्क में असीमित क्षमता और ज्ञान होता है और यह आपकी पसंद की हर एक चीज का निर्माण के सकता है।” सकारात्मक विचार, सकारात्मक कार्य, दान धर्म, परोपकार आदि आपको आपके लक्ष्य प्राप्ति में सहायक होंगे।

मनुष्य अपना निर्धारित कार्य बिना किसी पूर्व तैयारी के ही प्रारम्भ कर देता है जो कि असफलता का कारण बनता है। इसके लिए दिनेश जी ने लक्ष्य को निर्धारित करने का सही तरीका बताया है। साथ ही साथ मस्तिष्क को उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जरूरी तथ्यों को एकत्रित कैसे करना है सभी लेखक महोदय ने समझाया है। मस्तिष्क सभी घटनाओं को घटित होने के क्रम में ही सहेज कर रखता है। व्यक्ति अपनी सुविधानुसार उन घटनाओं का उपयोग अपनी आवश्यक जानकारी जुटाने में करता है। लेखक ने इसके भी विभिन्न चरणों को विस्तार से बताया है।

ऊपर वर्णित लेखक के कार्यक्रम enlighten the lamp of your fortune अर्थात् भाग्य के दीपक को उजागर करे कि पूरी विधि का चरणबद्ध तरीके से विस्तार पूर्वक वर्णन किया है। इसमें वर्णित चरणों में इसकी तैयारियां की मुख्य है जैसे अन्य कार्यों को सिद्ध करने हेतु तैयारीयों पर ही ज्यादा जोर दिया जाता है वैसे ही। इसमें पहले कार्यक्रम हेतु आवश्यक उपकरणों को बतलाया गया है, को एक कहावत को भली भांति पूरी करती है जो कि है “बिना तलवार युद्ध कैसे लड़े”। इसके पश्चात पूरे दिन के समय को कार्य क्षेत्रों में बांटा गया है जिससे कार्यक्रम को आसानी से क्रियान्वित किया जा सके। समय के वितरित करने के पश्चात मुख्य कार्य की क्रियाविधि का विस्तार से वर्णन किया गया है। इस क्रियाविधि को ग्यारह आसान चरणों में संपन्न किया जाता है। जिसमें अपने नकारत्मक विचारों, शब्दों को त्याग करके सकारात्मकता से विचार करना पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इसी प्रकार आगे ऑटो – सजेशंस व इच्छा पर्ची जैसे चरणों का उल्लेख है। इस प्रक्रिया में अंतिम चरण धन्यवाद का है जिसमें कार्य सिद्धि के पश्चात व्यक्ति दान आदि से ईश्वर एवं प्रकृति तथा कार्य सिद्धि में सहायक सभी चीज़ों का धन्यवाद करता है। किताब के अंतिम अध्याय में समय की महत्ता एवं विभिन्न युगों, साहित्यों, वेद पुराणों में वर्णित समय की परिभाषा का वर्णन किया है। 

दिनेश जी द्वारा रचित यह किताब पाठक कि दृष्टि से समझने के लिए सरल व सुगम है। भाषा क्लिष्ट न होकर सरल है। सभी अध्याय एक दूसरे से जुड़े हुए और प्रवाहबद्ध है। अध्यायाओं में वर्णित जानकारी कुछ पाठकों के लिए नवीन प्रतीत हो सकती है परन्तु अधिकतर जानकारियां हिन्दू सनातन धर्म ग्रंथों में वर्णित जानकारियों का ही प्रतिरूप है। मेरी तरह मस्तिष्क से संबंधित जानकारियां एकत्रित करने वालों के लिए यह पुस्तक बहुत सहायक सिद्ध होगी।

Ratings:
4.4/5

Author Name:  Dinesh Sahay 
Book Title:  Mastisk Aur Vicharo Se Jivan ki Rachna Kaise Kare ?
Publisher:  Booksclinic Publishing (2019)
Paperback: 115 pages  
Review by:  Kalpna at Criticpsace Journal

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